`नोटबंदी से किसानों को 50 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का नुकसान`

मुख्य रूप से नकद लेनदेन पर आधारित देश का कृषि क्षेत्र नोटबंदी के कारण बुरे दौर से गुजर रहा है और बड़े किसानों का कहना है कि फल एवं सब्जी उत्पादकों को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। नोटबंदी की मार झेल रहे देश के किसान चाहते हैं कि केंद्र सरकार आगामी बजट में उनके लिए कुछ राहत की घोषणाएं करे।



इस बीच ऐसी खबरें भी आती रहीं किकिसानों ने दाम गिर जाने के कारण टमाटर और मटर सहित अन्य फसलें नष्ट कर दीं या फेंक दीं। फलों और सब्जियों की कीमतों में अचानक आई तेज गिरावट थोक कारोबारियों के पास उन्हें खरीदने के लिए नकद राशि का न होना रहा। 


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किसान नेता अजय वीर जाखड़ का कहना है, "जल्द खराब हो जाने वाली फसलें, जैसे फल औरसब्जियां उगाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ा है।" भारत कृषक समाज के अध्यक्ष जाखड़ ने आईएएनएस से कहा, "यह बहुत बड़ा नुकसान है।" 

 

किसान जागृति मंच के अध्यक्ष सुधीर पंवार बताते हैं, "जब थोक व्यापारी ही कह दे कि फसल खरीदने के लिए रुपये नहीं है तो किसानों के पास क्या उपाय बचता है? या तो रद्दी के भाव पर अपनी फसल बेच दे या पूरी फसल ही नष्ट कर दे।" पंवार का कहना है कि फल और सब्जियों की खरीद नकद में होती है और नोटबंदी की घोषणा के ढाई महीने बाद भी किसान इसका नुकसान झेल रहे हैं।

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